4 July 2026

aawaj uttarakhand

सच की आवाज़

‘बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार’ के मंत्र के साथ एम-पैक्स नेतृत्व प्रशिक्षण शुरू

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर देहरादून में दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ, 54 एम-पैक्स के निर्वाचित पदाधिकारी ले रहे भाग; सहकारिता को ग्रामीण विकास और किसानों की समृद्धि का मजबूत माध्यम बनाने पर जोर

देहरादून,  अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर सहकार भारती उत्तराखण्ड की ओर से माधव सिंह भण्डारी किसान भवन, 6 रिंग रोड, देहरादून में श्रद्धेय लक्ष्मणराव इनामदार एम-पैक्स (एमपीएसीएस) नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। उत्तराखण्ड शासन के सहकारिता विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग एवं वन विभाग के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन प्रदेश के सहकारिता एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने किया।

कार्यक्रम में गढ़वाल मंडल के सात जनपदों की 54 बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (एम-पैक्स) के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, निदेशक एवं अन्य निर्वाचित पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रशिक्षण का उद्देश्य नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को सहकारिता के सिद्धांतों, सुशासन, वित्तीय प्रबंधन, आधुनिक तकनीक, नेतृत्व क्षमता और किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी देकर समितियों को अधिक सक्षम, पारदर्शी एवं आत्मनिर्भर बनाना है।

अपने संबोधन में सहकारिता एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि समाज को संगठित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एम-पैक्स को बहुउद्देशीय संस्थाओं के रूप में विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है, ताकि किसानों को एक ही मंच पर कृषि ऋण, उर्वरक, बीज, विपणन, भंडारण और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने पदाधिकारियों से पारदर्शिता, जवाबदेही और सेवा भाव के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल, प्रांत संपर्क प्रमुख अनिल वर्मा, सहकार भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय पाचपोर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील गुप्ता, सहकार भारती उत्तराखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार गौड़, प्रदेश संगठन प्रमुख राजेश वर्मा, प्रदेश सह-संगठन प्रमुख मणिराम नौटियाल, प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर कुमार जोशी, प्रदेश मंत्री रविन्द्र, विभाग प्रमुख प्रशांत अनुज कौशिक, गीतांजलि ढौंडियाल, शशि रतूड़ी, रविंद्र डोभाल, बी.पी. खंडूरी तथा डॉ. हरीश रावत सहित अनेक पदाधिकारी एवं सहकारिता से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण वर्ग के प्रथम तकनीकी सत्र में उत्तराखण्ड सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ल ने “एम-पैक्स का प्रभावी प्रबंधन, वित्तीय सुदृढ़ीकरण एवं किसान सेवा” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में एम-पैक्स की भूमिका केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इन्हें गांव की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाना होगा। उन्होंने कहा कि यदि समितियां कृषि आदानों की आपूर्ति, डेयरी, विपणन, भंडारण, जन सेवा केंद्र, उपभोक्ता सामग्री वितरण तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों को अपनाएं तो वे आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बन सकती हैं।

उन्होंने ऋण वसूली प्रणाली को प्रभावी बनाने, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को न्यूनतम रखने, समयबद्ध ऑडिट सुनिश्चित करने तथा वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर विशेष बल दिया। साथ ही डिजिटल लेखांकन, ऑनलाइन पासबुक, मोबाइल एप आधारित सेवाएं तथा सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकाधिक उपयोग को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को त्वरित सेवाएं मिल सकेंगी।

आनंद शुक्ल ने उत्तराखण्ड सहकारी संघ द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, विपणन सहायता, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने देश के सफल सहकारी मॉडलों का उल्लेख करते हुए बताया कि बेहतर प्रबंधन, नवाचार और जनसहभागिता के माध्यम से कई एम-पैक्स ने अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके व्याख्यान के दौरान प्रतिभागियों ने अनेक व्यावहारिक प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने विस्तारपूर्वक समाधान किया।

प्रशिक्षण वर्ग में सहकारिता विभाग के एडिशनल रजिस्ट्रार सुमन कुमार, नाबार्ड के डिप्टी जनरल मैनेजर भूपेंद्र कुमावत तथा सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के आशोक शती ने भी विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने सहकारी संस्थाओं में सुशासन, पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया, वित्तीय अनुशासन और संस्थागत क्षमता विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार गौड़ ने कहा कि सहकार भारती का उद्देश्य सहकारिता को केवल आर्थिक व्यवस्था तक सीमित रखना नहीं, बल्कि इसे संस्कार, सेवा, स्वावलंबन और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनाना है। उन्होंने कहा कि संगठन के मूल मंत्र “बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार” को केंद्र में रखकर पदाधिकारियों में नैतिक नेतृत्व, ईमानदारी, पारदर्शिता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित की जा रही है। उनका कहना था कि मजबूत एम-पैक्स ही आत्मनिर्भर गांव, समृद्ध किसान और सशक्त उत्तराखण्ड की आधारशिला बनेंगे।

प्रशिक्षण वर्ग के दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों, विशेषज्ञ व्याख्यानों, संवाद कार्यक्रमों एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को सहकारिता के आधुनिक स्वरूप, वित्तीय प्रबंधन, शासन व्यवस्था, डिजिटल प्रणाली तथा किसान हितैषी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।